छत्तीसगढ़ी शादी गीतों की परंपरा

छत्तीसगढ़ी शादी गीत, जिन्हें बिहाव गीत भी कहा जाता है, छत्तीसगढ़ की लोक संस्कृति का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। ये गीत विवाह के प्रत्येक संस्कार और रस्म के दौरान गाए जाते हैं। इनका उद्देश्य केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि विवाह की परंपराओं, पारिवारिक भावनाओं, रिश्तों की मिठास और सामाजिक मूल्यों को जीवित रखना भी है। छत्तीसगढ़ में विवाह के दौरान महिलाओं द्वारा समूह में गाए जाने वाले ये गीत पीढ़ी-दर-पीढ़ी मौखिक परंपरा से चले आ रहे हैं।

1. छत्तीसगढ़ी शादी गीत क्या हैं?

बिहाव गीत वे लोकगीत हैं जो विवाह की अलग-अलग रस्मों जैसे टिकावन, चुलमाटी, तेल चढ़ाई (हल्दी), मंगरोहन, परघनी, भांवर, नहडोरी और विदाई के समय गाए जाते हैं। प्रत्येक रस्म का अपना अलग गीत और भाव होता है।

2. शादी गीतों की परंपरा

  • विवाह की शुरुआत से लेकर विदाई तक हर रस्म में अलग-अलग गीत गाए जाते हैं।
  • अधिकांश गीत महिलाएँ सामूहिक रूप से गाती हैं।
  • गीतों में दूल्हा-दुल्हन, माता-पिता, भाई-बहन और रिश्तेदारों की भावनाओं का सुंदर चित्रण होता है।
  • कई गीतों में हास्य, गारी (मजाकिया छेड़छाड़) और आशीर्वाद का समावेश होता है।

3. प्रमुख विवाह गीत

  • मंगरोहन गीत – विवाह की शुभ शुरुआत।
  • चुलमाटी गीत – मंडप की तैयारी के समय।
  • तेलचढ़ी (हल्दी) गीत – हल्दी रस्म के दौरान।
  • मायमौरी गीत – दूल्हा-दुल्हन के श्रृंगार के समय।
  • परघनी गीत – बारात के स्वागत में।
  • भांवर गीत – सात फेरे लेते समय।
  • गारी गीत – हंसी-मजाक और पारिवारिक मनोरंजन।
  • बिदाई गीत – दुल्हन की विदाई पर भावुक गीत।

4. वाद्य यंत्र

छत्तीसगढ़ी विवाह गीतों में मुख्य रूप से इन वाद्य यंत्रों का प्रयोग होता है:

  • ढोलक
  • मांदर
  • मंजीरा
  • झांझ
  • हारमोनियम
  • टिमकी

5. गीतों की विशेषताएँ

  • सरल और मधुर छत्तीसगढ़ी भाषा।
  • लोकधुनों पर आधारित संगीत।
  • सामूहिक गायन की परंपरा।
  • हास्य, प्रेम, आशीर्वाद और भावुकता का सुंदर मिश्रण।
  • सामाजिक और पारिवारिक एकता का संदेश।

6. सांस्कृतिक महत्व

  • लोक परंपराओं का संरक्षण।
  • नई पीढ़ी को संस्कृति से जोड़ना।
  • परिवार और समाज में प्रेम, सम्मान और सहयोग की भावना बढ़ाना।
  • विवाह समारोह को आनंदमय और यादगार बनाना।

7. वर्तमान समय में बदलाव

आज भी ग्रामीण क्षेत्रों में पारंपरिक बिहाव गीतों की परंपरा जीवित है। हालांकि शहरों में डीजे और फिल्मी संगीत का चलन बढ़ा है, फिर भी हल्दी, परघनी और विदाई जैसी रस्मों में पारंपरिक छत्तीसगढ़ी विवाह गीत गाने की परंपरा बनी हुई है।

निष्कर्ष

छत्तीसगढ़ी शादी गीत केवल संगीत नहीं, बल्कि लोकसंस्कृति, पारिवारिक प्रेम, सामाजिक एकता और पारंपरिक रीति-रिवाजों का जीवंत दस्तावेज हैं। ये गीत विवाह को एक धार्मिक, सांस्कृतिक और भावनात्मक उत्सव में बदल देते हैं तथा छत्तीसगढ़ की समृद्ध लोक विरासत को आज भी जीवित रखे हुए हैं। 

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